दलहन और तिलहन का उत्पादन बढ़ाना सरकार के लिए खासा चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। इस साल दलहन और तिलहन के उत्पादन में कमी आने की संभावना है। ऐसे में कृषि मूल्य एवं लागत आयोग (सीएसीपी) ने दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ाना देने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने की सिफारिश की है।सीएसीपी ने खरीफ सीजन की दलहन और तिलहन फसलों का एमएसपी 1,000 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ाने की सिफारिश की है। सरकार सीएसीपी की सिफारिशों...
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दलहन व तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए एनएफएसएम का बजट आवंटन 500 करोड़ रुपये बढ़ाकर 1,850 करोड़ रुपये कर दिया गया है। उत्तर भारत के राज्यों के मुकाबले पूर्वी भारत के राज्यों में दलहन व तिलहन की प्रति हैक्टेयर उत्पादकता बढऩे की ज्यादा संभावना है।व तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए देश के साठ हजार गांवों में चलाई जा रही स्कीम का विलय राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) में कर दिया गया है।इस स्कीम का विलय किए...
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सरकार ने खरीफ सीजन के लिए धान, दालों और तिलहन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 37 फीसदी तक बढ़ा दिया है।कैबिनेट की बैठक में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 16 फीसदी बढ़ाकर 1,250 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। तिलहन और दालों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 37 फीसदी की जोरदार बढ़ोतरी की गई है ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके।उड़द का न्यूनतम समर्थन मूल्य 30 फीसदी बढ़ाकर 4,700 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। हालांकि,...
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तेल वर्ष 2011-12 (नवंबर से अक्टूबर) के दौरान देश में खाद्य तेलों का रिकॉर्ड 101.9 लाख टन का आयात हुआ है। सॉल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार घरेलू तिलहनों की पैदावार में कमी आने के साथ ही खपत में बढ़ोतरी होने से खाद्य तेलों के आयात में बढ़ोतरी हुई है।एसईए के कार्यकारी निदेशक डॉ. बी. वी. मेहता के अनुसार वर्ष 2011-12 में तिलहनों की घरेलू पैदावार कम हुई थी जबकि खाद्य तेलों की घरेलू...
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प्रदेश के शुष्क व अर्द्धशुष्क क्षेत्रों की भूमि में क्षारियता व लवण की समस्या को देखते हुए कृषि विभाग ने भूमि सुधार कार्यक्रम हाथ में लिया है। इसमें कृषकों को अनुदान पर जिप्सम मिलेगा। जिप्सम के प्रयोग से दलहनी व तिलहनी फसलों की गुणवत्ता में बढ़ोतरी होगी।कृषि विभाग की ओर से वर्ष 2011-12 मे जिप्सम उपयोग दर को बढ़ाने के लिए क्षारीय भूमि सुधार कार्यक्रम में 24 हजार मैट्रिक टन, आइसोपॉम कार्यक्रम के तहत...
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में गेहूं की बुवाई में 2.29 लाख हैक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है लेकिन तिलहनों की बुवाई में 4.72 लाख हैक्टेयर और दालों की बुवाई में 1.14 लाख हैक्टेयर तथा मोटे अनाजों की बुवाई में 2.72 लाख हैक्टेयर की कमी आई है।ऐसे में चालू रबी में गेहूं के उत्पादन में तो बढ़ोतरी होने की संभावना है लेकिन तिलहन, दलहन और मोटे अनाजों की पैदावार में कमी आने की आशंका है।कृषि मंत्रालय द्वारा जारी बुवाई आंकड़ों के अनुसार चालू रबी...
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तिलहन वायदा में आज तेजी आई है। एनसीडीईएक्स पर सरसों करीब 1 फीसदी और सोयाबीन वायदा में करीब 0.5 फीसदी ऊपर कारोबार हो रहा है। गौर करने वाली बात ये है कि चालू रबी सीजन में देश में तिलहन की बुआई करीब 5 फीसदी बढ़ गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अबतक 61,28,000 हेक्टेयर में तिलहन की बुआई हो चुकी है।मेंथा तेल में जोरदार तेजी आई है। एमसीएक्स पर मेंथा तेल का भाव करीब 1.5 फीसदी तक उछल गया है। नवंबर वायदा की इस...
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मंडियों में दलहन और तिलहन की आवक हो रही है। इस वजह से तेजी सीमित है। लेकिन अप्रैल से आवक हल्की पड़ जाएगी और आयात पर निर्भरता बढ़ जाएगी। इसके अलावा गर्मियों में दलहन की खपत भी बढ़ जाएगी। इससे अप्रैल के बाद उपभोक्ताओं को ज्यादा तेजी झेलनी होगी।सीजन में दलहन और तिलहन का उत्पादन घटने के अनुमान से इनकी कीमतों में तेजी आने लगी है। अप्रैल में उपभोक्ताओं को दलहन और खाद्य तेलों की तेजी और ज्यादा चुभने लगेगी।...
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कमजोर मानसूनी बारिश के कारण तिलहनी फसलों जैसे सोयाबीन और मूंगफली की बुुवाई प्रभावित हो रही है। अगर मानसून सक्रिय नहीं हुआ और तिलहनी फसलों की बुवाई कम क्षेत्र में हो पाई तो इसका उत्पादन प्रभावित होगा। अनुमान है कि इन हालातों में भारत का खाद्य तेल आयात अगले नवंबर से शुरू होने वाले नए मार्केटिंग वर्ष में दस फीसदी बढ़ जाएगा। भारत में खाद्य तेलों की 50 फीसदी से ज्यादा खपत आयात से ही पूरी होती है।दुनिया...
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चालू वित्त वर्ष में दाल और तिलहनों के उत्पादन में कमी आने के अनुमान से दाल और खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। इससे आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं का घरेलू बजट और बिगड़ सकता है। महंगे आयात के कारण पहले ही कीमतों में तेजी बनी हुई है।कृषि मंत्रालय ने 2011-12 में दालों का उत्पादन 9.6 लाख टन और तिलहनों की पैदावार 19.5 लाख टन घटने का अनुमान लगाया है।महंगाई भड़कने का अंदेशा इसलिए भी पुख्ता माना...
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