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छोड़िए, यह मंत्रीजी की जुबान है, अकसर फिसल ही जाती है। जुबान का फिसलना मंत्रीजी के लिए कोई खास मायने नहीं रखता। इसलिए वे जुबान के फिसलने पर कभी माफी नहीं मांगते। माफी भला कब तक मांगते रहेंगे, यह तो जुबान है, कभी भी, कहीं भी फिसल सकती है! जुबान फिसलना कोई बुरी बात नहीं। इस बहाने कम से कम मंत्रीजी कातो जनता के सामने आ जाता है। जनता जान जाती है कि मंत्रीजी उसके प्रति कितने सहज-सजग हैं। राजनीति में सिर्फ...
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